શકીલ કાદરીની ગઝલો

ઉર્દૂ અને ગુજરાતી ગઝલો

हाथ में जिस के

हाथ में जिस के जाम है साक़ी
उस को मेरा सलाम है साक़ी

लोग कहेते हैं मेरी ग़ज़लों में
सिर्फ़ तेरा ही नाम है साक़ी

नाम लेकर ख़ुदा का प्याली भर
कितनी नूरानी शाम है साक़ी

मेरी ग़ज़लों से लाख बहेतर है
जो ख़ुदा का कलाम है साक़ी

शे’र बेवजह मैं नहीं कहेता
ऐसा करना हराम है साक़ी

अश्क बहेते हैं जो नदामत के
उन का तौबा ही नाम है साक़ी

जो सुनाता है आयतें रब की
उस को दिल से सलाम है साक़ी

सुब्ह उठ कर सलाम पढता हूँ
बस यही नेक काम है साक़ी

जितने मैकश हैं उन की आँखों में
दर्ज तेरा ही नाम है साक़ी

शाह तुझ को ‘शकील’ने माना
अब वो तेरा ग़ुलाम है साक़ी

– शकील क़ादरी

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