શકીલ કાદરીની ગઝલો

ઉર્દૂ અને ગુજરાતી ગઝલો

Category: अज़ीज़ क़ादरी

अंबर की संदल

अंबर की संदल की बातें होती हैं
शह्रों में जंगल की बातें होती हैं

दो सखियाँ मिल जाती हैं जब मैके में
कंगन की काजल की बातें होती हैं

बरसों का दिल के सौदे में ज़िक़्र कहाँ
ये तो पल दो पल की बातें होती हैं

गलियों में बाज़ारों में चौराहों पर
मुझ जैसे पागल की बातें होती हैं

तुम माज़ी के शैदाई तुम में अक़्सर
कल के क़िस्से कल की बातें होती हैं

दिन में अम्न पे तकरीरें करते हैं लोग
रातों को दंगल की बातें होती हैं

दानाओं की महेनत से बाग़ों में ‘अज़ीज़’
नादानों में फल की बातें होती हैं

– अज़ीज़ क़ादरी